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छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में अब पात्र विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग देने का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र (DACE) की स्थापना और इसके माध्यम से कोचिंग पाठ्यक्रम संचालित करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। केंद्र में भारत सरकार की संबंधित योजनाओं के प्रावधानों के तहत पात्र अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी बच्चों को प्राथमिकता के अनुसार कोचिंग की सुविधा दी जाएगी। प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को UPSC सिविल सेवा परीक्षा, CGPSC, कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड के साथ बैंकिंग, बीमा और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इससे पात्र विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी सेवाओं में चयन के लिए व्यवस्थित अध्ययन और उचित मार्गदर्शन का अवसर मिल सकेगा। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद कुलसचिव को केंद्र की स्थापना और पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। हालांकि, मुफ्त कोचिंग के लिए आवेदन प्रक्रिया, प्रवेश की तारीख, सीटों की संख्या और पात्रता से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश अभी घोषित नहीं किए गए हैं। इन जानकारियों के जारी होने के बाद ही विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के अनुसार, डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र के जरिए पात्र विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देना और उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना उद्देश्य है। अब विद्यार्थियों को केंद्र के संचालन और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
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मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारें दर्ज की जा रही हैं, वहीं ग्वालियर और चंबल संभाग में अधिकतम तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 21 जिलों में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। राजगढ़, नीमच, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना समेत कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और जबलपुर संभाग के कुछ जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के अन्य संभागों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। ग्वालियर और चंबल संभाग में अधिकतम तापमान में 2.4 से 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। चंबल संभाग में तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री तक नीचे रहा, जबकि ग्वालियर संभाग में यह सामान्य से 2 डिग्री कम दर्ज किया गया। इसके विपरीत, इंदौर संभाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री तक अधिक रहा। शनिवार सुबह 8:30 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, उज्जैन जिले के झारड़ा में सबसे अधिक 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, विजयपुर में 8 मिलीमीटर, सबलगढ़ में 6 मिलीमीटर और धार में 3.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने राजगढ़, आलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम में इस बदलाव के पीछे कई मौसमी प्रणालियों का सक्रिय होना बताया जा रहा है। उत्तरी हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण मौजूद है। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और दक्षिणी मध्य प्रदेश के आसपास तथा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों तक प्रदेश के तापमान और मौसम की स्थिति में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
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इंदौर में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कार्यकर्ताओं से विपक्ष के मुकाबले सत्ता में रहते हुए ज्यादा मेहनत करने की अपील की। विट्ठल रुक्मिणी गार्डन में ‘लोकतंत्र बचाओ-भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान को लेकर आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि देश को बचाने की चिंता भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अलावा कौन कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत की तरक्की को रोकना चाहती हैं और देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई CJP से नहीं है। साथ ही, एक नवंबर को इंदौर में प्रस्तावित पैदल यात्रा को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को दोगुनी मेहनत करने का संदेश दिया। बैठक में विजयवर्गीय ने विधायकों और जनप्रतिनिधियों को पैदल यात्रा में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी। उन्होंने विधायक रमेश मेंदोला से खेल जगत से जुड़े लोगों, गोलू शुक्ला से सनातनी और भगवा वस्त्रधारी लोगों, मधु वर्मा से सिख समाज तथा महापौर पुष्यमित्र भार्गव से वकीलों को जोड़ने की बात कही। वहीं, टीनू जैन और अक्षय कांति बम को जैन समाज और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की जिम्मेदारी देने की बात सामने आई। विजयवर्गीय ने कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है, जिसका जवाब देने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहना होगा। बैठक में नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने 2003 से पहले कांग्रेस सरकार के दौरान हुए आंदोलनों का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से पूछा कि कितने लोगों ने पुलिस की लाठियां खाई थीं। इस सवाल पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हाथ उठाए। इसके बाद मंत्री तुलसीराम सिलावट को लेकर की गई टिप्पणी पर बैठक में ठहाके भी लगे। बैठक का निर्धारित समय शाम 5:30 बजे था, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय रात करीब 8 बजे पहुंचे। उन्होंने देरी की वजह दशहरे के दौरान लोगों से मुलाकात में व्यस्तता बताई। इस बीच, विधायक मालिनी गौड़ बैठक से रवाना हो चुकी थीं और लंबे इंतजार के कारण कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी दिखाई दी। वहीं, विजयवर्गीय के इस बयान कि सत्ता में रहते हुए विपक्ष से ज्यादा मेहनत करनी होगी, को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। खबर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनके कथित मतभेदों और कैबिनेट बैठकों में शामिल नहीं होने जैसी बातों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, बैठक में विजयवर्गीय ने अपने बयान को किसी व्यक्तिगत या आंतरिक राजनीतिक विवाद से जोड़कर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा। उनका मुख्य संदेश संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और आगामी पैदल यात्रा को सफल बनाने पर केंद्रित रहा।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी पर दिए गए बयान को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में घमासान मच गया है। नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश की घटनाओं का जिक्र करते हुए भारत में भी कुछ ताकतों द्वारा ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की कोशिश किए जाने की बात कही थी। उनके बयान का समर्थन करते हुए भोपाल से भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। शर्मा ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग होने का दावा करते हुए कहा कि आंदोलन देश को तोड़ने के बजाय समाधान के लिए होने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस विजयादशमी पर राहुल गांधी रूपी रावण का भी अंत होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने आने वाले FCRA कानून का हवाला देते हुए विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों का खुलासा होने की बात कही। भाजपा सांसद आलोक शर्मा के आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तो फिर अलग-अलग वर्गों के लोग विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर क्यों उतर रहे हैं? त्रिपाठी ने कहा कि सरकार को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय जनता की नाराजगी के कारणों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने RSS पर भाजपा का बचाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता सब समझ रही है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी। इस तरह मोहन भागवत के बयान से शुरू हुई सियासी बहस अब भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गई है। कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठने पर भाजपा उनके बचाव में क्यों उतर आती है और क्या पार्टी निर्वाचन आयोग की प्रवक्ता बन गई है? त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि भाजपा ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है और सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक मंत्री के इस्तीफे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर तुलना करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। कुल मिलाकर, मोहन भागवत के बयान, आलोक शर्मा की टिप्पणियों और कांग्रेस के पलटवार के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में एक जमानतदार के साथ बॉन्ड भरने और 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था। यह नोटिस 17 अक्टूबर की तारीख का है, जिसे नई दिल्ली जिला पुलिस ने 18 अक्टूबर को जारी किया। नेहा बोरा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और नोटिस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। AISA का आरोप है कि पुलिस का नोटिस अस्पष्ट और तथ्यों के लिहाज से गलत है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन बताया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े हैं। संगठन की कानूनी टीम हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करने की तैयारी में है। वकील स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने भी पेश होकर हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की जानकारी देंगे। मामले की पृष्ठभूमि 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ी है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। नेहा बोरा प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं, तभी दिल्ली पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया था। अगली सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया। AISA का आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें कई जगह ले जाया गया और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। रिहाई के बाद नेहा ने पुलिस की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा था कि लोकतंत्र और संविधान के लिए आवाज उठाना अपराध नहीं है। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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मध्य प्रदेश के जबलपुर से हैदराबाद के बीच हवाई सफर करने वाले यात्रियों को दिवाली से पहले किराए में राहत मिल सकती है। 25 अक्टूबर से इस रूट पर एटीआर विमान की जगह एयरबस का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे टिकटों के दाम में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फिलहाल सामान्य दिनों में जबलपुर से हैदराबाद की टिकट के लिए यात्रियों को करीब 6,500 से 9,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। एयरबस शुरू होने के बाद यह किराया घटकर लगभग 4,000 से 5,500 रुपये तक रह सकता है। हालांकि, वास्तविक किराया बुकिंग के समय, यात्रियों की मांग और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। किराए में संभावित गिरावट की प्रमुख वजह एयरबस में सीटों की अधिक संख्या होना है। मौजूदा एटीआर विमान में करीब 78 सीटें होती हैं, जबकि एयरबस में 180 से 186 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। विमानन कंपनियां डायनामिक प्राइसिंग के तहत टिकटों के दाम तय करती हैं। कम सीटों वाले विमान में सस्ती टिकटों की श्रेणी जल्दी भर जाती है, जिसके बाद यात्रियों को महंगे टिकट खरीदने पड़ते हैं। अधिक सीटों की उपलब्धता से कम किराए वाली श्रेणी में टिकट मिलने की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल व्यस्त दिनों में जबलपुर-हैदराबाद रूट का किराया 12 हजार से 18 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। एयरबस संचालन के बाद सामान्य दिनों में किराया 4,000 से 5,500 रुपये रहने का अनुमान है, जबकि आखिरी समय में टिकट लेने वाले यात्रियों को भी पहले की तुलना में राहत मिल सकती है। जबलपुर और आसपास के कटनी, नरसिंहपुर, मंडला और सिवनी जैसे जिलों के यात्रियों के लिए यह रूट काफी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद और बेंगलुरु में आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के साथ दक्षिण भारत के अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हैदराबाद से आगे बेंगलुरु, चेन्नई, केरल और खाड़ी देशों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट लेना भी सुविधाजनक हो सकता है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, विमान हैदराबाद से दोपहर 3:40 बजे रवाना होकर शाम 4:55 बजे जबलपुर पहुंचेगा। इसके बाद जबलपुर से शाम 5:25 बजे उड़ान भरकर शाम 6:45 बजे हैदराबाद पहुंचेगा। एयरबस की अधिक क्षमता और संभावित कम किराए से यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन जिले के मां चामुंडा धाम गजनीखेड़ी में 22.34 करोड़ रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने बड़नगर में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज के प्रसंस्करण और विपणन के बेहतर अवसर मिलेंगे, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। भाट पचलाना और इंगोरिया में नए सांदीपनि विद्यालय खोलने की भी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ की तैयारियों के तहत प्रदेश में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। उज्जैन और आगर में आलू प्रसंस्करण की नई इकाइयां शुरू की जा रही हैं, जो प्रदेश के 35 जिलों के किसानों से आलू खरीदेंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना का भी उल्लेख किया। साथ ही, दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने और मोरों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए नई परियोजना शुरू करने की जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चीतों के पुनर्वास, सड़क दुर्घटना में घायलों की सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क हादसे में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीरों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जबकि जरूरत पड़ने पर एयर एम्बुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी है। उन्होंने मध्य प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त होने की बात कही। इसके अलावा बड़नगर में कवि प्रदीप सम्मान समारोह आयोजित करने और गीता भवन बनाने की घोषणा भी की।
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गोंड समाज महासभा ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ जेएस धुर्वे ने नरसिंहपुर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 13 अक्टूबर को गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ अभियान पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया। इस मामले में मिसरोद के तत्कालीन थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने विरोध जताया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि अन्य पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गोंड समाज महासभा ने मांग की है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। संगठन ने हिरासत में लेने की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच करने और आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। महासभा का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, पुलिसकर्मियों को जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की मांग उठाई गई है। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर है।
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साउथ सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। 15 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने महज 6 दिनों में दुनियाभर में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म का छठे दिन भारत में नेट कलेक्शन 45.55 करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 289.05 करोड़ रुपये और ग्रॉस कलेक्शन 338.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, विदेशों में फिल्म ने छठे दिन करीब 10 करोड़ रुपये कमाए, जिससे इसका ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन 204 करोड़ रुपये हो गया। फिल्म की कुल वर्ल्डवाइड कमाई 542.45 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कमाई के साथ ‘जेलर 2’ साल 2026 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। इसके आगे रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ और अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ हैं। ‘धुरंधर 2’ की दुनियाभर में कमाई 1,813.39 करोड़ रुपये, जबकि ‘दृश्यम 3’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 556.22 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में ‘जेलर 2’ और ‘दृश्यम 3’ के बीच कमाई का अंतर काफी कम रह गया है। फिल्म का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है और इसका निर्माण सन पिक्चर्स ने किया है। फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आ रहे हैं। उनके साथ रम्या कृष्णन, योगी बाबू, विद्या बालन और मिथुन चक्रवर्ती भी अहम भूमिकाओं में हैं। ‘जेलर 2’ की सफलता के साथ रजनीकांत ने एक और खास उपलब्धि हासिल की है। उनकी अब चार फिल्में दुनियाभर में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में शामिल हो गई हैं। इनमें ‘2.0’ (2018), ‘जेलर’ (2023), ‘कुली’ (2025) और अब ‘जेलर 2’ शामिल हैं। वहीं, ‘जेलर 2’ के साथ रिलीज के आसपास सिनेमाघरों में पहुंची ‘रणबाली’ और ‘नई नवेली’ की कमाई इससे काफी पीछे है। पांचवें दिन तक ‘रणबाली’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 52.40 करोड़ रुपये और ‘नई नवेली’ का 24.68 करोड़ रुपये बताया गया है। बॉक्स ऑफिस के इन आंकड़ों के बीच ‘जेलर 2’ की तेज रफ्तार ने फिल्म इंडस्ट्री में रजनीकांत के स्टारडम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में कोटा सिटी पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। कोटा एसपी तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले के मुख्य संदिग्ध पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से गुजर रहे हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने कोटा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में घेराबंदी कर करीब 15 मिनट में तीनों को पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी रेहान उर्फ सुक्का, बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और एक नाबालिग के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों की योजना दिल्ली पहुंचकर वहां से नेपाल भागने की थी। एसपी ने बताया कि रेहान कथित तौर पर अनिल पंडित के संपर्क में था, जिसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस इस संपर्क और फायरिंग की घटना के बीच संबंधों की जांच कर रही है। वारदात में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं। मुंबई पुलिस की टीम कोटा पहुंच गई है और आरोपियों को उसके हवाले करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग की घटना 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई, जब टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से कार में लौट रहे थे। हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर गोलीबारी की, जिसमें ड्राइवर और वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। टाइगर श्रॉफ को भी शीशे का टुकड़ा लगने से चोट आई, हालांकि उन्हें गोली नहीं लगी। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर हथियारों की बरामदगी और घटना के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने में जुटी है।
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दिल्ली हाईकोर्ट में Gen Z यानी जेनरेशन Z को लेकर की गई टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “The only person who qualifies as a GenZ.” इसका हिंदी अर्थ है, “सिर्फ यही एक व्यक्ति हैं, जिन्हें Gen Z कहा जा सकता है।” उनकी पोस्ट ऐसे समय सामने आई, जब दिल्ली हाईकोर्ट में सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र को लेकर सुनवाई के दौरान जेन-जी का जिक्र हुआ था। हालांकि, दीपके ने अपनी पोस्ट में न तो अदालत का नाम लिया और न ही यह स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर किस संदर्भ में साझा की है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों की उम्र पूछी। वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रांका 31 साल के हैं। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि क्या वे Gen Z नहीं हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शनों में शामिल लोगों और उनके उद्देश्यों को लेकर भी सवाल उठाए। दोनों की ओर से 19 अक्टूबर को हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी गई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान उन्होंने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी। हाईकोर्ट की टिप्पणी और अभिजीत दीपके की पोस्ट के बीच समय का अंतर कम होने के कारण सोशल मीडिया पर दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे अदालत की टिप्पणी पर व्यंग्य के रूप में समझ रहे हैं, लेकिन दीपके ने अपनी पोस्ट के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट नहीं किया है। ऐसे में यह कहना कि उनकी टिप्पणी सीधे तौर पर हाईकोर्ट की सुनवाई को लेकर ही थी, फिलहाल अटकल होगी। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ की गई इस एक लाइन की पोस्ट ने Gen Z की परिभाषा और अदालत की टिप्पणी को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को स्पेशल एग्जिक्युटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह मार्च CJP के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया जाना था। संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। दीपके की पेशी के दौरान मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। संगठन की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया के जरिए उनकी पेशी की जानकारी साझा की। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। ये प्रावधान शांति बनाए रखने और संभावित अपराध को रोकने से संबंधित हैं। वहीं, CJP ने आरोप लगाया था कि दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद कई घंटों तक उनके परिवार, वकीलों और संगठन के सदस्यों को उनके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर संगठन और पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। हालांकि, हिरासत और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। CJP चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कर रहा है। इससे पहले संगठन से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। दीपके की हिरासत और कोर्ट में पेशी ने इस विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल, अदालत में हुई सुनवाई के नतीजे और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अब मामले में अदालत के अगले कदम और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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