Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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भारतीय वायुसेना के तत्वावधान में आयोजित अब तक के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' का पहला चरण 12 अगस्त 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस मेगा एयर एक्सरसाइज में मित्र राष्ट्रों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित एक दर्जन से अधिक देशों की वायुसेनाएं अपने उन्नत फाइटर जेट्स, रीफ्यूलर एयरक्राफ्ट और अवाक्स (AWACS) विमानों के साथ हिस्सा ले रही हैं। अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस, राफेल और सुखोई-30 एमकेआई विदेशी वायुसेनाओं के लड़ाकू विमानों के साथ जटिल हवाई रणनीतियों, बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) कॉम्बैट और संयुक्त काउंटर-एयर ऑपरेशन्स का अभ्यास कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस विशाल युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागी देशों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ाना और आधुनिक युद्ध तकनीकों के अनुभव साझा करना है। सामरिक दृष्टि से यह युद्धाभ्यास भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं और उसकी बढ़ती वैश्विक सैन्य साख का प्रदर्शन करता है। इस आयोजन से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मित्र देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत होगा और भारतीय वायुसेना की तकनीकी व परिचालन दक्षता में नया निखार आएगा।
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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक के विरोध में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में मौन मार्च निकालकर फ्लैश लाइटें जलाईं और सरकार से सीधे संवाद की मांग दोहराई। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा ने मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया था, जिसका राजधानी सहित राज्य के कई हिस्सों में असर देखने को मिला। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC CGL परीक्षा रद्द करना और JPSC की भर्ती प्रक्रिया में सुधार शामिल है। आंदोलन के दौरान बीते दिनों देवेंद्रनाथ महतो सहित छह लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में भी विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे पहले भाजपा पर आंदोलनकारी अभ्यर्थियों को राजनीतिक लाभ के लिए गुमराह करने का आरोप लगाया था और आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी। सरकार और छात्रों के बीच अब तक कोई ठोस बातचीत सफल नहीं हो पाई है, जिससे आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है।
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केंद्रीय चुनाव आयोग ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय परामर्श बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा चुनावी फंडिंग, चंदे के डिजिटल लेनदेन और राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाना था। बैठक के दौरान चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के समक्ष कुछ नए प्रस्ताव रखे, जिनमें अज्ञात दानदाताओं से मिलने वाले चंदे की सीमा तय करने और पार्टी के वित्तीय खातों का ऑडिट समयबद्ध तरीके से कराने की बात शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव में काले धन का प्रभाव खत्म करना और मतदाता को सही जानकारी उपलब्ध कराना निष्पक्ष चुनावों के लिए बेहद जरूरी है। विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों पर अपने-अपने विचार और व्यावहारिक सुझाव आयोग के समक्ष रखे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने आश्वासन दिया कि सभी दलों द्वारा दिए गए सुझावों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाएगा और आवश्यक सुधारों के लिए केंद्र सरकार को संस्तुति भेजी जाएगी। इस पहल को भारतीय चुनावी व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने चुनावी अभियान को धार देने की शुरुआत कर दी है। पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे और राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश की सियासी पिच पर सक्रिय नजर आ रहे हैं और उन्होंने योगी सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा है। अपने भाषण में आकाश आनंद ने उम्र के लिहाज से अखिलेश यादव को 'अंकल' कहना स्वाभाविक बताते हुए तंज कसा। इसके जरिए बसपा युवा मतदाताओं के बीच खुद को नई पीढ़ी की आवाज के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह बसपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह जेन-जी और युवा मतदाताओं पर विशेष फोकस कर रही है। उत्तर प्रदेश में करीब 13 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 18 से 27 वर्ष की उम्र के करीब दो करोड़ से अधिक युवा मतदाता हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक 2027 के विधानसभा चुनाव में यह युवा वर्ग कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि अब मतदाता केवल पारंपरिक जातीय समीकरणों के बजाय रोजगार, शिक्षा और सोशल मीडिया जैसे मुद्दों पर भी वोट का फैसला कर रहे हैं।
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झारखंड की राजधानी रांची में पत्रकार और टीवी एंकर अमन चोपड़ा से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी उन्हें एक रेस्टोरेंट में नाश्ते की टेबल से अपने साथ ले जाते दिखाई दिए। बाद में सामने आया कि सदर अस्पताल के हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अस्पताल के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की शिकायत पर हुई। मामले से जुड़े पत्रकारों का कहना है कि इसके पीछे असल वजह झारखंड पेपर लीक मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन की कवरेज है, जो राज्य सरकार को पसंद नहीं आई। वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिन्हा ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अगर सरकार को कवरेज से आपत्ति थी तो उसके पास गलत रिपोर्टिंग को लेकर कानूनी विकल्प थे, लेकिन इस तरह पूछताछ के लिए उठा ले जाना उचित नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और प्रशासन के साथ उनके टकराव का मुद्दा मीडिया जगत में गरमा दिया है। पत्रकार संगठनों ने चिंता जताई है कि संवेदनशील मुद्दों पर सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जाना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक नाबालिग यौन शोषण पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रसारित कर उसकी निजता का उल्लंघन करने के लिए नेटवर्क पर 5 लाख रुपये का हर्जाना लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि मीडिया यह नहीं कह सकता कि वह कोई सार्वजनिक काम नहीं कर रहा। ब्रॉडकास्टर की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि अन्य मीडिया कंपनियों को इसी मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है, लेकिन पीठ ने कहा कि पीड़िता ने जब प्रकाशन में शामिल न होने का अनुरोध किया था, तब भी नेटवर्क ने आगे बढ़कर प्रसारण किया। इस फैसले को मीडिया जगत में निजता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर एक अहम नजीर के तौर पर देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में संवेदनशील मामलों, खासकर नाबालिगों और यौन शोषण पीड़ितों से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर न्यूजरूम की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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देश के बुजुर्गों को सामाजिक, कानूनी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 12 अगस्त 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने टोल-फ्री हेल्पलाइन सेवा 'एल्डरलाइन' के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत अब केवल फोन पर परामर्श ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति में असहाय बुजुर्गों तक मौके पर पहुंचकर सीधी मदद पहुंचाने का तंत्र भी विकसित किया गया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक किसी भी समय 14567 नंबर पर कॉल करके पेंशन संबंधी समस्याओं, वृद्धाश्रमों में जगह, कानूनी अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, जिन बुजुर्गों को उनके परिजनों द्वारा प्रताड़ित या अकेला छोड़ दिया गया है, उन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन के साथ विशेष टीमें बनाई गई हैं। वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठनों ने सरकार की इस संवेदनशीलता की प्रशंसा की है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि तेजी से बदलते सामाजिक परिदृश्य और एकल परिवारों के दौर में यह सरकारी हेल्पलाइन देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों को एक मजबूत सुरक्षा चक्र और मानसिक संबल प्रदान कर रही है।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं में कुपोषण को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से 12 अगस्त 2026 को देश भर में 'राष्ट्रीय पोषण एवं बाल विकास सप्ताह' की शुरुआत की गई। इस विशेष अभियान के तहत देश के लाखों आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को फोर्टिफाइड पोषाहार, आवश्यक विटामिन्स और निशुल्क स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अभियान के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल डिवाइस और ग्रोथ मॉनिटरिंग स्केल दिए गए हैं ताकि वे हर बच्चे के वजन और लंबाई की रियल-टाइम ट्रैकिंग 'पोषण ट्रैकर ऐप' पर दर्ज कर सकें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती 1,000 दिनों में बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिलना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। योजना में स्थानीय मोटे अनाजों (श्री अन्न) के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय निकायों के सहयोग से गांवों में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जहां माताओं को स्तनपान, स्वच्छता और संतुलित आहार के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इस एकीकृत प्रयास के माध्यम से देश के ग्रामीण और पिछड़े जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण की दर में भारी कमी लाना है।
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नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री कीर्ति सुरेश ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि वे लगातार शूटिंग और ट्रैवल के कारण बीते 41 घंटे से बिना सोए काम कर रही हैं और उन्हें आराम करने तक का समय नहीं मिल पाया है। उनके इस खुलासे ने फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर हवा दे दी है, जहां लंबे समय से शिफ्ट की समयसीमा तय करने की मांग उठती रही है। कीर्ति ने अपने पोस्ट में बताया कि वे करीब 24 घंटे बाद अपने कमरे में पहुंची हैं, जिसमें से लगभग 20 घंटे उन्होंने लगातार शूटिंग की। उन्होंने बताया कि पिछले दिन सुबह 6 बजे वे काम के लिए निकली थीं और अब भी सुबह के 6 बज चुके हैं, जबकि उन्हें महज एक घंटे के ब्रेक के बाद फिर अगले काम के लिए निकलना है। इसके बावजूद अभिनेत्री ने इसे शिकायत लायक समस्या बताते हुए सकारात्मक नजरिया दिखाया। अभिनेत्री ने कहा कि वे अपने व्यस्त जीवन को शिकायत के बजाय एक आशीर्वाद के रूप में देखती हैं और मानती हैं कि यही जिंदगी का असली मजा है। उनके इस पोस्ट पर फैंस और साथी कलाकारों ने भारी संख्या में प्रतिक्रिया दी, जिसमें कई लोगों ने उनकी मेहनत की सराहना की तो कुछ ने इंडस्ट्री में काम के घंटों को नियंत्रित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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करीब 19 साल बाद इमरान हाशमी की चर्चित फिल्म 'आवारापन' का सीक्वल 'आवारापन 2' बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहा है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने फिल्म को रिलीज के लिए हरी झंडी दे दी है। बोर्ड की जांच समिति ने फिल्म को यूए 16 प्लस सर्टिफिकेट देने से पहले निर्माताओं को 9 जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद फिल्म को मंजूरी मिली। फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के एक सीन में इस्तेमाल किए गए अश्लील शब्द को ऑडियो और सबटाइटल दोनों में बदलने का निर्देश दिया। इसके अलावा फिल्म के दूसरे हाफ में एक हिंसक सीन को 50 प्रतिशत तक कम करने और तीन अन्य अत्यधिक हिंसक सीन हटाने को कहा गया। फिल्म के बीच में मौजूद एक ड्रग्स कंजम्पशन सीन को भी पूरी तरह हटाया गया। सीबीएफसी रिकॉर्ड के मुताबिक फिल्म का रनटाइम 2 घंटे 20 मिनट है, जबकि 2007 में आई पहली फिल्म करीब 2 घंटे 13 मिनट की थी। नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में नजर आएंगे। उनके साथ दिशा पाटनी और वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगी। पहली फिल्म में इमरान हाशमी के किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा था, और अब लंबे इंतजार के बाद नई कहानी व दमदार कलाकारों के साथ इसकी वापसी को लेकर फैंस में उत्सुकता है।
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अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव को समझना भारत के लिए क्यों जरूरी है, यह जानना अहम है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंध और युद्ध क्षतिपूर्ति को लेकर विवाद गहराया है, जिसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ा है। कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जो सीधे तौर पर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की चिंता बढ़ाती है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा आयात से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में हर बदलाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ाता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। इसका आगे चलकर महंगाई, परिवहन लागत और आम आदमी के बजट पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे यह मुद्दा केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं रह जाता। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही तनाव में कभी नरमी आए, लेकिन आपूर्ति शृंखला, बीमा लागत और पुराने कॉन्ट्रैक्ट को सामान्य होने में समय लगता है। ऐसे में भारत सरकार और रिजर्व बैंक को आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार पर करीबी नजर रखनी होगी, ताकि वैश्विक अस्थिरता का असर आम जनता की जेब पर कम से कम पड़े।
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संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव क्यों बढ़ रहा है, यह समझना जरूरी है। विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह को सदन में जवाब देना चाहिए। इसके साथ ही अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का मुद्दा भी विपक्ष लगातार उठा रहा है, जिससे सत्र में गतिरोध और गहरा गया है। यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश के महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर पड़ रहा है। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ रही है, जिससे सरकार के विधायी एजेंडे में देरी हो रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहकर गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब तक सहमति नहीं बन पाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गतिरोध आगामी चुनावों से पहले दोनों पक्षों की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है। विपक्ष जहां छात्रों और आस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरकर जनसमर्थन जुटाना चाहता है, वहीं सरकार चर्चा का प्रस्ताव देकर खुद को जवाबदेह दिखाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इस टकराव का असर संसद की उत्पादकता पर साफ दिखाई देगा।
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