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छत्तीसगढ़ के नवागढ़ क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। समूह जल आवर्धन योजना के तहत 54 गांवों तक साफ पानी पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन अब कई गांवों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत नांदघाट के पास शिवनाथ नदी पर इंटकवेल और ग्राम अड़ार में फिल्टर प्लांट बनाया गया था। बताया जा रहा है कि नदी में कटाव और पानी के बहाव की दिशा बदलने से इंटकवेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके चलते वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए केवल एक समय ही पानी की आपूर्ति की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिवनाथ नदी में अवैध रेत उत्खनन के कारण कटाव बढ़ा है और नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। नांदघाट के निवासी लेखराम वर्मा ने नदी में पानी का स्तर घटने पर चिंता जताते हुए एनीकट के संधारण, तटबंध निर्माण और स्थायी जल संरक्षण उपायों की जरूरत बताई। वहीं, नवागढ़-छितापार सहित कई जगहों पर पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होने के आरोप भी सामने आए हैं। करमन, धोबनी, ठेंगा भाठ और रिसा अमली समेत कई गांवों के लोग पेयजल की समस्या से परेशान हैं। बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण क्लोरीन कक्षों की बदहाली का दावा भी किया गया है।
जल संकट को लेकर संबंधित विभाग का कहना है कि इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है। विभाग ने स्वीकार किया है कि पानी की कमी के कारण फिलहाल एक समय ही जलापूर्ति हो पा रही है और पानी की टंकियों की सफाई कराई जाएगी। हालांकि, आठ साल में एनीकट के संधारण और नियमित जलापूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ग्रामीण स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग 54 गांवों में पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।
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