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भोपाल में नवरात्र और गरबा महोत्सव के बाद ऑनलाइन शॉपिंग की रिटर्न पॉलिसी के दुरुपयोग का मामला चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक, कुछ ग्राहकों ने गरबा नाइट के लिए महंगे लहंगे, चनिया-चोली और दूसरे पारंपरिक कपड़े ऑनलाइन मंगवाए, उन्हें पहनकर तस्वीरें खिंचवाईं और त्योहार खत्म होने के बाद वापस कर दिया। इस चलन से ई-कॉमर्स कंपनियों और कपड़ों के विक्रेताओं की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, हर रिटर्न को पॉलिसी का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता, क्योंकि साइज और फैब्रिक की समस्या के कारण भी ग्राहक सामान लौटाते हैं।
त्योहार के बाद भोपाल के एमपी नगर, करोंद और हलालपुरा के डिलीवरी हब में रिटर्न पार्सल बढ़ने की जानकारी सामने आई है। डिलीवरी एजेंटों के मुताबिक, सामान्य दिनों में रोजाना दो से तीन रिटर्न पैकेट आते थे, जबकि इस सीजन में इनकी संख्या बढ़कर 10 से 12 तक पहुंच गई। कपड़े वापस आने पर विक्रेताओं को रिवर्स शिपिंग, क्वालिटी चेकिंग और दोबारा पैकेजिंग का खर्च उठाना पड़ता है। वहीं, इस्तेमाल किए गए या खराब स्थिति में लौटाए गए कपड़ों को दोबारा बेचना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
रिटर्न के बढ़ते मामलों को देखते हुए आने वाले समय में ई-कॉमर्स कंपनियां कपड़ों और फैशन से जुड़ी कैटेगरी में अपनी रिटर्न पॉलिसी सख्त कर सकती हैं। इसके तहत सामान लौटाने की शर्तों और उसकी स्थिति की जांच पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, पॉलिसी में बदलाव को लेकर किसी खास कंपनी की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में चुनौती ग्राहकों को आसान रिटर्न की सुविधा देने के साथ-साथ उसके गलत इस्तेमाल को रोकने की है, ताकि खरीदारों के अधिकार सुरक्षित रहें और विक्रेताओं को भी अनावश्यक नुकसान न उठाना पड़े।
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