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तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन’ में छठ महापर्व और लोककथा को बड़े पर्दे पर दिखाया गया है। अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें यह कॉन्सेप्ट इसलिए खास लगा क्योंकि इसमें लोककथा, फैंटेसी, आस्था और एक्शन का मेल है। उनके मुताबिक, भारत में छठ जैसे कई पर्व और उनसे जुड़ी कथाएं हैं, जिन्हें सिनेमा के जरिए बड़े दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि करीब 30 से 40 करोड़ लोग छठ महापर्व मनाते हैं और पहली बार इसे इतने बड़े स्तर पर फिल्म में दिखाने का प्रयास हुआ है।
फिल्म के ‘छठी मैया’ गाने की शूटिंग के दौरान तमन्ना भावुक हो गई थीं। उन्होंने बताया कि विशाल मिश्रा की आवाज में गाना पहली बार सुनते ही उन्हें लगा कि यह हर भक्त की अंदरूनी भावना को सामने रखता है। सूर्य देव को अर्घ्य देने वाले दृश्य की शूटिंग के दौरान उन्हें जीवन के उतार-चढ़ाव को लेकर एक आध्यात्मिक सीख महसूस हुई। तमन्ना के मुताबिक, छठ का संदेश है कि जिस तरह डूबते सूर्य के बाद उसका उदय होता है, उसी तरह मुश्किल दौर के बाद बेहतर समय भी आता है। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उनके भीतर कृतज्ञता की भावना को और गहरा किया।
तमन्ना ने फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कई जगह लोग इसे सिर्फ फिल्म की तरह नहीं, बल्कि पर्व के माहौल के साथ देख रहे हैं। कुछ दर्शक थिएटर के बाहर जूते-चप्पल उतारकर अंदर जा रहे हैं और कई जगह ठेकुआ बांटने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें बचपन से ‘द ममी’ जैसी मैजिक और फोकलोर वाली फिल्में पसंद रही हैं और इसी वजह से उन्हें लगा कि ‘द वन’ ऐसी कहानी है जिसे परिवार के लोग साथ बैठकर देख सकते हैं।
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