19 साल बाद कोलकाता में भावुक हुईं तस्लीमा नसरीन, बोलीं- ‘बिना दोषी ठहराए मुझे शहर छोड़ने पर मजबूर किया गया’
Taslima Nasrin 19 साल बाद कोलकाता के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में उन्हें शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, जबकि किसी भी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, तो उन्हें निर्वासन जैसी सजा क्यों मिली। तस्लीमा ने कहा कि यूरोप ने उन्हें नागरिकता और सुरक्षा दी, लेकिन दोनों बंगाल में रहने की जगह नहीं मिल सकी। उन्होंने 1994 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद से 32 वर्षों के निर्वासन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कट्टरपंथ के विरोध में लिखा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक ऐसे बांग्लादेश का सपना देखती हैं, जहां धर्म और राज्य अलग-अलग हों तथा स्वतंत्र विचार रखने वालों को भय के बिना जीने का अधिकार मिले।
कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में तस्लीमा का सम्मान किया गया, जहां Suvendu Adhikari ने उनकी सुरक्षा का भरोसा दिया और कहा कि जब भी वह कोलकाता आएंगी, उन्हें पूरा संरक्षण मिलेगा। कार्यक्रम में Swapan Dasgupta ने भी उनका स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी लेखक को अपनी बात कहने का अधिकार मिलना चाहिए, भले ही हर विचार से सहमति न हो। तस्लीमा ने अपने संबोधन में कहा कि 2004 में कोलकाता लौटने और बाद में आत्मकथा द्विखंडित पर लगा प्रतिबंध हटने के बावजूद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अब वह सिर्फ इतना कहना चाहती हैं—"कोलकाता, मैं वापस आ गई हूं।"