कोरोना के बाद बढ़ी नींद की गोलियों की मांग, जबलपुर में हर महीने करोड़ों की बिक्री
sleeping pills rises post-COVID; sales,  monthly in Jabalpur

कोरोना महामारी के बाद बदली जीवनशैली और बढ़ते मानसिक तनाव का असर लोगों की नींद पर साफ दिखाई दे रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग रोजाना छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। जबलपुर में स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है, जहां कोरोना काल के बाद नींद से जुड़ी दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर महीने करीब 1.25 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक की नींद संबंधी दवाइयां बिक रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल स्क्रीन का अधिक उपयोग, देर रात तक वेब सीरीज देखना, तनाव, शहरी जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार पर्याप्त नींद न मिलने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात का भोजन सोने से 3–4 घंटे पहले करें, सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं तथा नियमित दिनचर्या अपनाएं। यदि लंबे समय तक नींद न आने की समस्या बनी रहे, तो बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की गोलियां लेने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

 
Priyanshi Chaturvedi 6 July 2026

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