Patrakar Priyanshi Chaturvedi
उत्तर प्रदेश में आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में मतभेद सामने आया है। हमीरपुर के फैमुद्दीन और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिना उचित नोटिस और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। दोनों न्यायाधीशों की अलग-अलग राय के बाद अब यह मामला अंतिम निर्णय के लिए चीफ जस्टिस के पास भेजा गया है, जो नई पीठ या तीसरे जज का गठन करेंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने 51 पन्नों के फैसले में बुलडोजर कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक बताते हुए रद्द करने का सुझाव दिया। उन्होंने बशीर बद्र के शेर का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल एफआईआर के आधार पर घर गिराना अनुचित है और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से पहले लंबे नोटिस की समय-सीमा तय करने की बात कही। वहीं, जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने असहमति जताते हुए कहा कि अदालत को नई समय-सीमा तय करने के बजाय मौजूद कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही पीठ ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अनधिकृत निर्माणों को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी तल्ख टिप्पणियां कीं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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