Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्यप्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। उच्च स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने 110 साल पुराने दस्तावेज, वंशावली और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनके एससी प्रमाण पत्र को वैध माना है। सुनवाई के दौरान प्रतिमा बागरी ने यह भी तर्क दिया कि आज भी कुछ ऊंची जातियों के लोग बागरी समाज के साथ भेदभाव करते हैं और उनके घरों में भोजन नहीं करते, जिससे यह साबित होता है कि उनका समाज राजपूत या ठाकुर समुदाय का हिस्सा नहीं है। इस दलील के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और मंत्री पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, शिकायतकर्ता और कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। उनका आरोप है कि सरकार ने मंत्री को बचाने का काम किया, जबकि प्रतिमा बागरी का कहना है कि उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाने की कोशिश की गई थी और समिति ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद सही निर्णय दिया है। इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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