पाकिस्तान में 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़े जाने पर भारत सख्त, मनजिंदर सिरसा बोले- अब वहां सिर्फ 8 हजार सिख बचे
पाकिस्तान के लाहौर के पास फारूकाबाद में स्थित करीब 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के कथित ध्वस्तीकरण को लेकर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आरोप है कि एक स्थानीय कारोबारी ने बिना सरकारी अनुमति के गुरुद्वारे के एक हिस्से को गिरा दिया। घटना पर दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बंटवारे के समय लाखों सिख पाकिस्तान में रहते थे, जबकि अब वहां केवल लगभग 8,000 सिख ही बचे हैं। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए पाकिस्तान सरकार से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। भारत ने यह भी कहा कि गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाए जाने के दौरान स्थानीय प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण की निष्क्रियता चिंताजनक है।
विवाद बढ़ने के बाद पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने मामले में संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री मरियम नवाज के निर्देश पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने घटनास्थल का दौरा किया और घोषणा की कि सरकार अपने खर्च पर ऐतिहासिक गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण कराएगी। साथ ही जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध तोड़फोड़ की जांच संबंधित विभाग को सौंप दी गई है।