Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने OBC क्रीमीलेयर से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि महिला अभ्यर्थी की पात्रता तय करते समय उसके पति की आय को आधार नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण महिला के माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा। साथ ही यह भी साफ किया गया कि जब तक पति क्लास-1 अधिकारी न हो, तब तक उसकी आय को शामिल नहीं किया जा सकता।
यह मामला सहायक प्राध्यापक (लॉ) पद पर नियुक्ति से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता सुनीता यादव ने चयनित अभ्यर्थी गरिमा राठौर को क्रीमीलेयर में मानते हुए चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि गरिमा राठौर के पति सिविल जज हैं और परिवार की आय निर्धारित सीमा से अधिक है। हालांकि कोर्ट ने माना कि महिला की क्रीमीलेयर स्थिति उसके माता-पिता के आधार पर तय होगी, न कि पति की आय से, और इस आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।
कोर्ट ने यह भी पाया कि चयनित अभ्यर्थी के पिता क्लास-थर्ड अधिकारी और माता गृहिणी थीं, जिससे वह क्रीमीलेयर में नहीं आती हैं। वहीं, याचिकाकर्ता की 2021 से वरिष्ठता देने की मांग भी अस्वीकार कर दी गई। इस फैसले से OBC आरक्षण से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता सामने आई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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