Patrakar Priyanshi Chaturvedi
ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट का असर भारत समेत मध्यप्रदेश के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। गैस की कमी और पेट्रोकेमिकल सामग्री की महंगाई से निर्माण क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। कांच, टाइल्स और प्लास्टिक के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे मकान बनाने की लागत बढ़ेगी। फर्नीचर और फुटवेयर के दामों में भी उछाल आने की संभावना है। उद्योग जगत ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में महंगाई आम जनता पर सीधे असर डालेगी।
मोरबी की टाइल्स फैक्टरियों के बंद होने से इंदौर और आसपास के जिलों में टाइल्स की आपूर्ति प्रभावित हुई है। कम उत्पादन के कारण टाइल्स के रेट में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही कॉपर मेटल और पीवीसी महंगे होने से केबल के दाम भी पहले 500 रुपए के बंडल से बढ़कर 2500-3000 रुपए तक पहुंच गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, मकान निर्माण में इन चीजों की महंगाई का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा।
केमिकल इंडस्ट्री में गैस की कमी से डिटर्जेंट, साबुन और बर्तन धोने वाले पावडर भी महंगे हो रहे हैं। पेट्रोकेमिकल से बनने वाले प्लास्टिक दाने पहले 80 रुपए प्रति किलो में मिलते थे, अब 170 रुपए तक पहुंच गए हैं। इससे फुटवेयर और प्लास्टिक फर्नीचर के दामों में उछाल आ रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और गैस संकट के असर से निर्माण, घरेलू सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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