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छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और तबादलों के बाद भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि पार्टी के संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। 12 अक्टूबर को हुए बदलावों में सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है, जिसके बाद संसदीय बोर्ड में एक जगह खाली हुई है। इसी के चलते संगठन के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि पार्टी की ओर से अभी किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में संभावित नए चेहरों के तौर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नामों की चर्चा है। दोनों नेता 2022 में हुए संगठनात्मक पुनर्गठन के दौरान संसदीय बोर्ड में शामिल नहीं किए गए थे। वहीं, पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसी सिख नेता को भी बोर्ड में जगह मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पूर्व IPS अधिकारी इकबाल सिंह लालपुरा 2022 में संसदीय बोर्ड में शामिल होने वाले पहले सिख नेता बने थे। हालांकि, इन संभावित नियुक्तियों को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी ने हाल के महीनों में संगठन में कई बदलाव किए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मई से राज्यों के पार्टी अध्यक्षों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की और 17 अगस्त को अपनी नई टीम घोषित की। इसके बाद 23 सितंबर को राज्यों के प्रभारियों की सूची जारी की गई। पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं मिलने वाले कुछ नेताओं को राज्यपाल बनाकर नई भूमिका दिए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था है, जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पदों के लिए नामों पर विचार करने, महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले लेने, गठबंधन और अनुशासन से जुड़े मामलों में भूमिका निभाता है।
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