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ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की संपत्ति का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 1989 से चल रहे इस मामले में ग्वालियर के अतिरिक्त जिला न्यायालय में बुधवार को सुनवाई होनी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवादित संपत्ति की कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर समझौते की बात सामने आई है, लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति के चलते मामला अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।
बताया जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने और लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए समझौते की पहल की। इस प्रस्ताव के तहत जिस सदस्य के पास वर्तमान में जो संपत्ति है, उसे उसी के हिस्से में रखने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है। इसमें ग्वालियर का जयविलास पैलेस भी शामिल है, जिस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का अधिकार बने रहने की जानकारी सामने आई है। परिवार की सदस्य वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे सहित अन्य पक्षों के बीच भी संपत्ति बंटवारे को लेकर सहमति बनने की बात कही गई है।
हालांकि, प्रतिमा देवी ने समझौते पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि उनसे धोखे से राजीनामे पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने मांग की है कि समझौते पर अंतिम निर्णय लेने से पहले विवादित मुद्दों पर सुनवाई हो और साक्ष्य दर्ज किए जाएं। ऐसे में अदालत के सामने अब यह तय करने का सवाल है कि समझौते के आधार पर डिक्री पारित की जाए या पहले प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो सकेगा कि दशकों पुराने संपत्ति विवाद के समाधान का रास्ता खुलता है या कानूनी लड़ाई आगे जारी रहती है।
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