Patrakar Priyanshi Chaturvedi
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव को समझना भारत के लिए क्यों जरूरी है, यह जानना अहम है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंध और युद्ध क्षतिपूर्ति को लेकर विवाद गहराया है, जिसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ा है। कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जो सीधे तौर पर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की चिंता बढ़ाती है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा आयात से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में हर बदलाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ाता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। इसका आगे चलकर महंगाई, परिवहन लागत और आम आदमी के बजट पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे यह मुद्दा केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं रह जाता।
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही तनाव में कभी नरमी आए, लेकिन आपूर्ति शृंखला, बीमा लागत और पुराने कॉन्ट्रैक्ट को सामान्य होने में समय लगता है। ऐसे में भारत सरकार और रिजर्व बैंक को आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा भंडार पर करीबी नजर रखनी होगी, ताकि वैश्विक अस्थिरता का असर आम जनता की जेब पर कम से कम पड़े।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved © 2026 Dakhal News.
Created By:
Medha Innovation & Development |