Patrakar Priyanshi Chaturvedi
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक नाबालिग यौन शोषण पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रसारित कर उसकी निजता का उल्लंघन करने के लिए नेटवर्क पर 5 लाख रुपये का हर्जाना लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि मीडिया यह नहीं कह सकता कि वह कोई सार्वजनिक काम नहीं कर रहा। ब्रॉडकास्टर की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि अन्य मीडिया कंपनियों को इसी मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है, लेकिन पीठ ने कहा कि पीड़िता ने जब प्रकाशन में शामिल न होने का अनुरोध किया था, तब भी नेटवर्क ने आगे बढ़कर प्रसारण किया।
इस फैसले को मीडिया जगत में निजता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर एक अहम नजीर के तौर पर देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में संवेदनशील मामलों, खासकर नाबालिगों और यौन शोषण पीड़ितों से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर न्यूजरूम की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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