Patrakar Priyanshi Chaturvedi
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जमीयत उलेमा-ए-मध्यप्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जो लोग अपनी धार्मिक संस्थाओं और मंदिरों से जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से नहीं संभाल पा रहे हैं, वे वक्फ की धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं की सुरक्षा कैसे करेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन स्वयं संभाले और वक्फ से जुड़े मामलों को मुस्लिम समुदाय पर छोड़ दे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कलेक्टर रैंक के सीईओ की नियुक्ति पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने यह भी कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल कर रही है, तो यही सिद्धांत मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं की समितियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार, किसी एक समुदाय की धार्मिक संस्था में दूसरे धर्म के लोगों को शामिल करना तभी उचित माना जा सकता है, जब सभी धार्मिक संस्थाओं में समान व्यवस्था अपनाई जाए।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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