Patrakar Priyanshi Chaturvedi
ईरान के भारत में विशेष प्रतिनिधि अयातुल्लाह हाकिम अली इलाही ने कहा कि मौजूदा युद्ध ईरान की पहल नहीं था, बल्कि उस पर थोप दिया गया। उनके मुताबिक, ईरान ने कूटनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास किया ताकि संघर्ष टल सके, लेकिन हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि यह टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संकट बन चुका है, जिसका असर तेल, गैस और खाद्य कीमतों पर साफ दिख रहा है।
इलाही ने साफ किया कि ईरान शांति चाहता है और जल्द युद्ध समाप्त करने के पक्ष में है, लेकिन अपनी शर्तों के साथ। अगर समझौता नहीं होता, तो ईरान लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि देश के पास वर्षों का युद्ध अनुभव है और जनता भी इस चुनौती के लिए मानसिक रूप से तैयार है, इसलिए किसी दबाव में झुकने का सवाल नहीं उठता।
सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान की व्यवस्था मजबूत बनी हुई है, क्योंकि यह संस्थागत ढांचे पर आधारित है, न कि किसी एक व्यक्ति पर। इलाही ने भारत-ईरान संबंधों को हजारों साल पुराना बताते हुए इसे सांस्कृतिक और शैक्षणिक रूप से गहरा बताया। साथ ही उन्होंने दुनिया के देशों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस युद्ध को समाप्त कराने में भूमिका निभाएं और मानवता की रक्षा करें।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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