Patrakar Priyanshi Chaturvedi
17 अगस्त को जारी आर्थिक बाजार आकलन के अनुसार भारतीय रुपया इस सप्ताह डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में रह सकता है। अनुमान 95 से 95.50 रुपये प्रति डॉलर के आसपास का है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी पूंजी प्रवाह जैसे कारक रुपये की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। RBI की बाजार में मौजूदगी और विदेशी मुद्रा प्रबंधन भी रुपये की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक RBI की कुछ विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधाओं के जरिए बड़ी मात्रा में डॉलर उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 31 अगस्त को एक डिस्काउंटेड फॉरेक्स स्वैप सुविधा की अवधि खत्म होने वाली है। बाजार में निवेशक RBI की 19 अगस्त को आने वाली मौद्रिक नीति बैठक की कार्यवाही के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे ब्याज दरों और भविष्य की मौद्रिक नीति के संकेत मिलने की उम्मीद है।
रुपये की स्थिरता भारत की आयात लागत, खासकर कच्चे तेल की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि डॉलर मजबूत होता है तो आयात महंगा हो सकता है और इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। दूसरी ओर विदेशी पूंजी का प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकता है। इस सप्ताह वैश्विक बाजारों के साथ RBI की नीतिगत दिशा भी मुद्रा बाजार के लिए प्रमुख संकेतक बनी रहेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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