Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भारत सरकार द्वारा देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने के लिए शुरू की गई नीतियों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। 11 अगस्त 2026 को जारी एक नई औद्योगिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, देश में स्थापित हो रही सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत की आयात पर निर्भरता में भी भारी कमी आई है।
दखल क्यों: भारत लंबे समय से मोबाइल, ऑटोमोबाइल और डिफेंस उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली सूक्ष्म चिप्स के लिए चीन और अन्य पूर्वी एशियाई देशों पर निर्भर था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधानों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए देश के भीतर चिप डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना बेहद अनिवार्य हो गया था। इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से भारत का टेक-इकोसिस्टम मजबूत होगा और देश को सामरिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर भारत के आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। सेमीकंडक्टर प्लांट्स की स्थापना से देश में हजारों उच्च-तकनीकी (High-Tech) नौकरियों का सृजन हो रहा है और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सस्ते हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में भारत दुनिया का प्रमुख चिप सप्लाई हब बन जाएगा, जिससे देश की आर्थिक संप्रभुता को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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