नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर व विंड) को बढ़ावा देने के फैसलों से क्यों घट रहा है भारत का कार्बन उत्सर्जन?
India

भारत में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के तेजी से विस्तार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। 11 अगस्त 2026 को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में ग्रीन एनर्जी का योगदान एक नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में किए गए सुधारों के कारण देश भर में बड़े सोलर पार्कों और रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना तेजी से हो रही है।

दखल क्यों: वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने और पेरिस समझौते के तहत अपने अंतरराष्ट्रीय संकल्पों को पूरा करने के लिए भारत के लिए जीवाश्म ईंधन (मुख्य रूप से कोयला) पर अपनी निर्भरता घटाना बेहद जरूरी था। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल और कोयले के आयात पर खर्च होने वाले भारी-भरकम बजट को बचाना भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती था। नवीकरणीय ऊर्जा की ओर यह कदम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए आवश्यक है।

स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने से शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आ रही है और औद्योगिक इकाइयों को सस्ती व निर्बाध बिजली मिल पा रही है। रूफटॉप सोलर योजना से आम घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल शून्य हो रहे हैं और वे ऊर्जा उत्पादक बन रहे हैं। यह बदलाव न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रहा है, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा आधार बन रहा है।

Priyanshi Chaturvedi 11 August 2026

Comments

Be First To Comment....

Video
x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved © 2026 Dakhal News.