Patrakar Priyanshi Chaturvedi
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दहेज हत्या के एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि माता-पिता को अपनी विवाहित बेटियों को हर हाल में “समझौता कर लो” या “घर बचा लो” जैसी सलाह देने से बचना चाहिए। अदालत ने कहा कि दहेज उत्पीड़न की शिकायत लेकर मायके पहुंचने वाली बेटी की बात को सामान्य वैवाहिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह उसकी सुरक्षा और मदद की पुकार हो सकती है। कोर्ट ने परिवारों से बेटियों की बात पर भरोसा करने और समय रहते उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
यह टिप्पणी श्रावस्ती के 2011 के दहेज हत्या मामले में की गई, जिसमें अदालत ने पति, ससुर, सास और दो अन्य पर दहेज हत्या व उत्पीड़न के मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा में संशोधन करते हुए अदालत ने आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा माना। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मृतका ने कई बार अपने परिवार को दहेज उत्पीड़न और जान से मारने की धमकियों की जानकारी दी थी, लेकिन उसे समझौता करने की सलाह दी गई, जो अंततः उसके लिए घातक साबित हुई।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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