Patrakar डॉ अजय खेमरिया
पश्चिम बंगाल में 2026 का विधानसभा चुनाव पहले ही रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपने मजबूत सामाजिक गठजोड़, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे लगातार चौथी बार सत्ता पर दावा कर रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी 2021 की हार से सीख लेकर क्षेत्रवार आक्रामक रणनीति के जरिए मुकाबले को निर्णायक बनाने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव का परिणाम बड़े मुद्दों से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और वोट ट्रांसफर तय करेगा।
टीएमसी बंगाली अस्मिता और कल्याणकारी योजनाओं को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। पार्टी महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं से सीधे मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दे रही है। इसके मुकाबले, भाजपा विकास, निवेश और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर को मुख्य एजेंडा बनाकर मैदान में है और राष्ट्रीयता के मुद्दे के जरिए डबल इंजन सरकार का विकास दावा पेश कर रही है।
उत्तर बंगाल में भाजपा का मजबूत आधार है, जबकि दक्षिण और मध्य बंगाल में टीएमसी का प्रभुत्व निर्णायक साबित होता है। ग्रेटर कोलकाता में शहरी और अल्पसंख्यक मतदाताओं ने टीएमसी को भारी समर्थन दिया है। वहीं, जंगलमहल में आदिवासी बहुल इलाके में टीएमसी ने अपना खोया जनाधार वापस पाया है। यही क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण 2026 में बंगाल की सत्ता तय करेंगे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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