Patrakar Priyanshi Chaturvedi
बुरहानपुर के गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में बुधवार को फागुन की रौनक देखते ही बन रही थी। फूलों की बौछार और पारंपरिक फाग गीतों की गूंज से मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया। “फाग खेलन बरसाने आए हैं” और “मेरी चुनर में लग गयो दाग” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और उल्लास के अनोखे संगम में लीन कर दिया।
छैल-छबीली होली में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और कार्यक्रम की शुरुआत पुष्प वर्षा से हुई। गोपियों और ग्वाल-बाल की झांकियों ने मंच पर सभी का मन मोह लिया। उत्सव का सबसे रोमांचक हिस्सा तब आया जब भक्तों ने गुलाल और लड्डू बरसाकर होली का आनंद लिया। मंदिर परिसर हर तरफ रंगों और हर्षोल्लास से भर गया।
मंदिर प्रमुख हरिकृष्ण मुखियाजी ने बताया कि बुरहानपुर में यह फाग उत्सव बसंत पंचमी से होलिका दहन तक लगातार 40 दिनों तक मनाया जाता है। लगभग 500 वर्ष पुरानी इस परंपरा में भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति और ब्रजधाम की अनुभूति के साथ शामिल होते हैं। कार्यक्रम के अंत में राल अर्पित कर विधिवत होलिका दहन किया गया, जिससे मंदिर परिसर भक्ति और रंगों के उत्सव में पूरी तरह डूब गया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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