मुकुल रॉय बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ का निधन, रेल मंत्रालय से जुड़ा किस्सा फिर चर्चा में
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। All India Trinamool Congress के संस्थापक सदस्यों में रहे रॉय ने बाद में Bharatiya Janata Party का दामन थामा और फिर वापसी भी की। संगठनात्मक पकड़ और रणनीतिक कौशल के कारण उन्हें राज्य की राजनीति का “चाणक्य” कहा जाता था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा के उभार के पीछे भी उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।

 

उनके राजनीतिक जीवन का एक चर्चित प्रसंग 2011 का है, जब Manmohan Singh की सरकार में वे रेल राज्यमंत्री थे। असम में गुवाहाटी-पुरी एक्सप्रेस हादसे के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें घटनास्थल पर जाने को कहा, लेकिन वे नहीं गए। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री स्वयं रेल मंत्री का प्रभार संभाले हुए हैं और वे हावड़ा में लाए जा रहे घायलों से मुलाकात कर रहे हैं। इस रुख को लेकर विवाद खड़ा हुआ और बाद के कैबिनेट फेरबदल में उनसे रेल मंत्रालय ले लिया गया।

 

हालांकि 2012 में रेल किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे के बाद मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया गया और उन्होंने किराया वृद्धि वापस ले ली। गठबंधन राजनीति के दौर में यह फैसला काफी चर्चा में रहा। सितंबर 2012 में जब ममता बनर्जी ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिया, तो मुकुल रॉय ने भी मंत्री पद छोड़ दिया। लंबे समय तक संगठन के मजबूत स्तंभ रहे रॉय ने अपने राजनीतिक सफर में टीएमसी और भाजपा—दोनों दलों में गहरी छाप छोड़ी

Priyanshi Chaturvedi 24 February 2026

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