छत्तीसगढ़ में 65 हजार शिक्षक पद खाली, फिर भी संतुलित अनुपात का दावा
छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में विरोधाभासी तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर सरकारी आंकड़ों में शिक्षक-छात्र अनुपात संतोषजनक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर करीब 65 हजार से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार राज्य में 1,78,731 शिक्षक कार्यरत हैं और कुल छात्र संख्या 51,67,357 है। यूडाइस डेटा के मुताबिक प्राइमरी में 18, अपर प्राइमरी में 15, सेकेंडरी में 14 और हायर सेकेंडरी में 12 छात्रों पर एक शिक्षक दर्ज है, जिससे कागजों पर स्थिति संतुलित दिखाई देती है।
हालांकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 2,44,054 हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब भी खाली है। इन आंकड़ों में प्राचार्य और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पदस्थ शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से खासकर ग्रामीण और एकल शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे विषयवार शिक्षण और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों के अलावा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगा दिया जाता है। परीक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद कई स्कूलों में पिछले कुछ महीनों से नियमित पढ़ाई बाधित बताई जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो भले ही अनुपात संतुलित दिखे, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।