Patrakar Priyanshi Chaturvedi
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 2018 से 2024 के बीच 250 से ज्यादा सैटेलाइट टीवी लाइसेंस रद्द कर दिए या प्रसारकों ने खुद ही लाइसेंस सरेंडर कर दिए। अब टीवी इंडस्ट्री फालतू बढ़त छोड़कर एक ऐसे दौर में जा रही है, जहां टिकाऊ और नियमों का पालन करने वाले चैनल ही टिक पाएंगे।
मुख्य कारण:
निष्क्रिय चैनल- जो चैनल 90 दिन से ज्यादा समय तक बिना प्रसारण के बंद रहे, उनके लाइसेंस अपने आप रद्द कर दिए गए।
उदाहरण:-
Peace TV Urdu (सुरक्षा कारणों से)
कई छोटे भोजपुरी चैनल भी बंद हो गए।
छोटे चैनलों का खुद से लाइसेंस छोड़ना– कुछ प्रसारकों ने खुद ही लाइसेंस सरेंडर कर दिया, क्योंकि बिजनेस में फायदा नहीं था।
उदाहरण:-
Harvest TV — राजनीतिक झगड़े और दिक्कतों के कारण बंद।
Real TV — ऑपरेशन बंद कर दिया और लाइसेंस लौटाया।
फाउंडर इंडिया नामक वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कई छोटे धार्मिक चैनल अब यूट्यूब पर शिफ्ट हो गए।
सुरक्षा और स्वामित्व के मुद्दे– कुछ चैनलों का लाइसेंस सुरक्षा मंजूरी न मिलने या अवैध तरीके से मालिक बदलने के कारण रद्द हुआ।
उदाहरण:-
Peace TV (जाकिर नाइक से जुड़ा) — सुरक्षा कारणों से बंद।
टीवी चैनल क्यों टिक नहीं पाए?
A. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बढ़ना– अब कई चैनल टीवी से हटकर यूट्यूब या ऐप्स पर आ गए हैं।
उदाहरण:-
Harvest TV की टीम अब डिजिटल पर काम कर रही है।
ABP गंगा भी अब डिजिटल-only ब्रांड बन गया है।
B. बड़े नेटवर्क्स का दबदबा– बड़े ग्रुप जैसे Zee, Network18 छोटे चैनलों को मिलाकर काम कर रहे हैं।
C. टेलिशॉपिंग और ज्योतिष चैनलों का घट जाना- ऐसे चैनल कमाई न होने पर खुद ही बंद हो रहे हैं।
इंडस्ट्री पर असर:
अब चैनलों की संख्या से ज्यादा कंटेंट की गुणवत्ता पर जोर है।
OTT प्लेटफॉर्म (जैसे JioCinema, YouTube) ने सैटेलाइट टीवी को कड़ी टक्कर दी है।
छोटे कस्बों और गांवों में लोग अब मोबाइल पर वीडियो देखना पसंद कर रहे हैं।
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