Patrakar Priyanshi Chaturvedi
देशभर में पटाखों के उत्पादन, उनको बेचने और स्टॉक पर पाबंदी की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिवाली पर लोग रात 8-10 बजे तक ही पटाखे चला सकेंगे। यह आदेश सभी धर्मों के त्यौहारों पर लागू होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि जो पटाखें चलाए जाएं वो कम धुएं और आवाज वाले हों ताकि प्रदूषण ना फैले। सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर से भी कुछ शर्तों के साथ रोक हटाई है। इसके तहत पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है।
इससे पहले जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा, हालांकि यह मामला सोमवार की सूची में शामिल था, लेकिन इस पर निर्णय 23 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।
शीर्ष कोर्ट ने 28 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने 2017 में दिल्ली-एनसीआर में दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी।
दरअसल, वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर देशभर में पटाखों पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पीठ ने इस मुद्दे पर याचिकाकर्ता, पटाखा निर्माता केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दलीलों को सुनने के बाद कहा था कि पटाखों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और इसके व्यापार के बीच एक संतुलन रखना होगा।
पीठ का कहना था कि जहां पटाखा निर्माताओं को अपने जीविकोपार्जन का मूल अधिकार प्राप्त है वहीं 130 करोड़ लोगों को भी अच्छे स्वास्थ्य का मूल अधिकार प्राप्त है।
सुनवाई के दौरान पटाखा निर्माताओं ने दलील दी थी कि दीपावली के बाद बढ़ने वाले वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ पटाखे जिम्मेदार नहीं हैं और सिर्फ इस वजह से पूरे उद्योग को बंद करने का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने बच्चों में श्वसन संबंधी दिक्कतों के बढ़ने पर चिंता जताते हुए पटाखों पर पूरी तरह से या फिर आंशिक प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।
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