बंद कमरे की बैठक में भाजपा की अंदरूनी कलह आई सामने, सिंधिया ने नेताओं को दी एकजुट रहने की नसीहत
गुना प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की भाजपा नेताओं के साथ हुई बंद कमरे की बैठक में संगठन के भीतर की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। बैठक में संगठन को मजबूत करने के बजाय कई नेताओं ने उपेक्षा और आपसी मतभेदों को लेकर अपनी नाराजगी जताई। स्थिति को देखते हुए सिंधिया ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि शिकायतों की राजनीति छोड़कर सभी नेताओं को पार्टी को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के सिद्धांतों और प्रयासों से खड़ी हुई है, इसलिए सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं का लक्ष्य संगठन की मजबूती होना चाहिए।
बैठक का सबसे चर्चित पहलू कई प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति रही। गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, विधायक प्रियंका मीना, पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा और राधेश्याम पारीख बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, गुना नगर पालिका के कई भाजपा पार्षदों ने भी दूरी बनाए रखी। सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यशैली और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से पार्षदों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैठक में प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भाजपा के भीतर बढ़ती गुटबाजी और खींचतान का संकेत है। उनका कहना है कि यदि संगठन स्तर पर मतभेदों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। फिलहाल सिंधिया की नसीहत के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की कोशिशों पर सबकी नजर रहेगी।