8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। यदि आयोग 2.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश करता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार, लेवल-1 के कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 45,000 रुपये हो सकता है, जबकि लेवल-13 का अधिकतम बेसिक पे 1,23,100 रुपये से बढ़कर 3,07,750 रुपये तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर में मामूली बदलाव भी सभी वेतन स्तरों पर व्यापक प्रभाव डालता है।
बेसिक वेतन बढ़ने का सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों पर भी पड़ेगा। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्तों की गणना बेसिक पे के आधार पर होती है, इसलिए संशोधित वेतन के साथ इनकी राशि भी बढ़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का संशोधित बेसिक वेतन 51,000 रुपये होता है, तो मौजूदा HRA दरों के अनुसार X श्रेणी के शहरों में उसे लगभग 15,300 रुपये, Y श्रेणी में 10,200 रुपये और Z श्रेणी में 5,100 रुपये HRA मिल सकता है।
हालांकि, अभी फिटमेंट फैक्टर को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था और वित्तीय बोझ को देखते हुए माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग भी इसी के आसपास की सिफारिश कर सकता है। दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगियों ने 3.83 से 5 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। आयोग विभिन्न राज्यों में कर्मचारी संगठनों से चर्चा के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।